कारण/ अकारण
स्वतंत्र स्त्रीया प्रेम को चुनती है समझदार स्त्री सुरक्षा को और चलाक स्त्रीया प्रेम और सुरक्षा दोनो को चुनती है यह तो आम सी बात है आखिर ...
स्वतंत्र स्त्रीया प्रेम को चुनती है समझदार स्त्री सुरक्षा को और चलाक स्त्रीया प्रेम और सुरक्षा दोनो को चुनती है यह तो आम सी बात है आखिर ...
में बहना चाहता हूँ शायद नदियों की तरह जंगल पहाड़ खेत खलयान शहरो से होते हुए ओर आखिर मे पहुँचना होगा सागर में और ये पहुँचना मेरी मंजिल...
जहाँ जाना हो चला जाता हूँ कब लोटुंगा किसी को नही बताता देर रात तक जागता हूँ सुबह भी कोई जल्दी नही उठाता जो खाना है खा लेता हूं उसमें नुकसा...
Instagram original post Music 🎵 🎶 download link 🔗 कल ही का तो जख्म है, आज भर जायगा कैसे ।। नया साल अरमान लेकर आता हैं ये दवा भला साथ...
सच है, गाँव में शुकून है , शांति है बहुत...... और शहर में भाग दौड़ हैं, असंतोष हैं, अतृप्ति हैं, लेकिन एक उम्मीद तो हैं, की कभी सब ठीक हो ...
sury.3_
लिखना शौक नहीं मजबूरी है मेरी ।